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Friday, August 14, 2020

10 सबसे ज्यादा प्रोटीन युक्त घटक

August 14, 2020 0

 प्रोटीन शरीर को निर्माण करने वाले सबसे महत्वपूर्ण तत्वों में से एक है। एक स्वस्थ मानव शरीर में लगभग 62% पानी 16% प्रोटीन 6% खनिज और 1% से कम कार्बोहाइड्रेट थोड़ी मात्रा में विटामिन और कुछ अन्य पदार्थ होते हैं।

10 सबसे ज्यादा प्रोटीन युक्त घटक


10 सबसे ज्यादा प्रोटीन युक्त घटक

 प्रोटीन हमारे शरीर में बालों मांसपेशियों त्वचा हड्डियों नाखूनों और रक्त कोशिकाओं में पाया जाता है रूटीन शरीर की मांसपेशियों को मजबूत बनाता है। साथ ही शरीर के संतुलन को बनाए रखने के लिए जरूरी है। प्रोटीन की पर्याप्त मात्रा हमारे बेहतर स्वास्थ्य के लिए बहुत जरूरी है।

यह जानिए- बुखार क्या है और हमें क्यों आता है?

 ऐसे में अक्सर लोग मानते हैं। कि प्रोटीन के लिए 'अंडा' सबसे बेहतर जरिया है। लेकिन आप भी जानिए कि कुछ फूड के बारे में जिन में सबसे ज्यादा प्रोटीन होता है।आज हम जानेंगे कि सबसे ज्यादा प्रोटीन किसमें होता है।


1) सोयाबीन 

सोयाबीन मीट (मास) और अंडे से भी ज्यादा प्रोटीन युक्त आहार है। प्रोटीन के अलावा सोयाबीन विटामिन बी कंपलेक्स विटामिन और खनिज पदार्थों से भी भरपूर होता है। इसके अलावा सोयाबीन फाइबर से भी भरपूर होता है। तो 100 ग्राम सोया चंक्स में करीब 50 ग्राम प्रोटीन होता है।


2) पनीर

पनीर दूध से बने सभी प्रोडक्ट स्वास्थ्य के लिए बेहद लाभकारी होते हैं। जो कि हमारे शरीर में कैल्शियम की कमी को पूरा करते हैं। पनीर भी दूध से ही तैयार होता है। और इसमें प्रोटीन साथ और फैट पाया जाता है। 100 ग्राम पनीर में 18 ग्राम के आसपास प्रोटीन होता है।


 3) मूंग की दाल

मूंग की दाल प्रोटीन की कमी पूरी करने का एक बहुत ही सस्ता साधन है। क्योंकि मूंग की दाल प्रोटीन से भरपूर होती है सिर्फ 100 ग्राम मूंग की दाल में करीब 24 ग्राम प्रोटीन पाया जाता है।


 4) बादाम 

बादम बेहतरीन किस्म के फ्लैट के साथ भरपूर प्रोटीन से युक्त होता है। 100 ग्राम बादाम में लगभग 21 ग्राम प्रोटीन पाया जाता है।


5) काजू 

काजू यूं तो काजू के कई फायदे हैं। और यह वजन बढ़ाने के लिए भी सहायक है। साथ ही यह प्रोटीन से भरपूर होता है। सिर्फ 100 ग्राम काजू में करीब 553 कैलरी 44 ग्राम सोंठ और करीब 18 ग्राम प्रोटीन होता है।


 6) दूध 

दूध सिर्फ शरीर में कैल्शियम की कमी को पूरा करके हड्डियों को मजबूत करता है। बल्कि यह प्रोटीन से भी भरपूर होता है। 1 लीटर दूध में करीब 40 ग्राम प्रोटीन पाया जाता है। 


7) अंकुरित अनाज 

अंकुरित अनाज भी प्रोटीन सेवन का एक बेहतरीन जरिया है। एक कप अंकुरित अनाज में करीब 15 ग्राम प्रोटीन होता है।


 8) मूंगफली 

यूं तो मूंगफली में फैट पाया जाता है। लेकिन यह प्रोटीन से भरपूर होती है। सिर्फ 100 ग्राम मूंगफली में करीब 26 ग्राम प्रोटीन होता है।


9) चना 

चना नासिर प्रोटीन बल्कि फाइबर से भी भरपूर होता है। इसे भिगोकर उबालकर या फ्राई करके भी खा सकते हैं। 100 ग्राम चने में करीब 15 ग्राम प्रोटीन पाया जाता है। 


10) दही 

दूध से बनी हर चीज में भरपूर प्रोटीन पाया जाता है। और इसीलिए दही भी प्रोटीन का एक बेहतर जरिया है। 100 ग्राम दही में करीब 11 ग्राम प्रोटीन होता है।


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 लेकिन हां बिना सोचे ज्यादा प्रोटीन के सेवन से नुकसान हो सकता है उस प्रोटीन का कितना सेवन करना चाहिए या आपकी उम्र आपका वजन और दिनचर्या पर निर्भर करता है। सही मात्रा में प्रोटीन के सेवन से जुड़ी जानकारी आप अपने चिकित्सक से ले इसी के साथ यह जानकारी आपको कैसी लगी हमें लिख करके जरूर बताइए... धन्यवाद

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Wednesday, August 12, 2020

बगल में पसीना और बदबू पसीने की बदबू रोकने के घरेलू उपाय

August 12, 2020 0
बगल में पसीना और बदबू पसीने की बदबू रोकने के घरेलू उपाय

गर्मियों के दिनों में सबसे ज्यादा आता है पसीना पसीना आना कोई समस्या नहीं है। लेकिन पसीने से आने वाली बदबू दूसरे लोगों को काफी ज्यादा परेशान करती है। दोस्तों अब इस पसीने की बदबू को दूर करने के लिए।

पसीना और बदबू पसीने की बदबू रोकने के घरेलू उपाय

 मार्केट में तरह-तरह के न्यूज़ वगैरह आते रहते हैं। जो कि आपको बदबू से निजात जरूर दिलाते हैं लेकिन केवल 1 या 2 घंटे तक और 2 घंटे बाद पहले से भी ज्यादा बदबू आने लगती है। लेकिन दोस्तों यहां पर ध्यान इस बात का दिया जाता है कि किसी इंसान को अगर स्किन एलर्जी है तो ऐसे में यह जियो और इस पे का प्रयोग करने से कई सारी प्रॉब्लम का भी सामना करना पड़ सकता है दोस्तों कुछ ऐसे घरेलू नुस्खे आज की इस आर्टिकल में हम आपको बताने वाले हैं जो कि बिल्कुल आसान है। इस का उपयोग करके आप पूरी तरह से नेचुरल ही शरीर से आने वाली बदबू को दूर कर सकते हैं।

 और इससे आपको कोई साइड इफेक्ट भी नहीं होगा तो आज की इस आर्टिकल में उसी की जानकारी हम आपके लिए लेकर आए हैं तो चलिए जानते ऐसे कौन कौन से घरेलू तरीके हैं जिसके जरिए पसीने से आने वाली बदबू से हम आसानी से निजात पा सकते हैं। 

मुल्तानी मिट्टी

 मुल्तानी मिट्टी से जी हां आप चाहे तो मुल्तानी मिट्टी को अपने बगल में और पैरों में रगड़ने और इसे सूखने दें जब यह पूरी तरह से सूख जाए तो इसे धो लें ऐसा करने से डेड स्किन या पुराना पसीना जो इसकी शरीर में फैल रहा है वह सुप्रभा निकल जाता है।

-: क्या आप यह जानते हैं मुंह से बदबू क्यों आती है?

हैंड सेनीटाइजर

 हैंड सेनीटाइजर जी हां अगर आप बहुत भीड़ वाली जगह पर है और शरीर से आने वाली पसीने की बदबू से छुटकारा पाना चाहते हैं तो इसके लिए हैंड सैनिटाइजर का प्रयोग कर सकते हैं दोस्तों इसके लिए आपको हैंड सैनिटाइजर की कुछ मात्रा हाथों में लगानी है और इसे अपने बगल में रगड़ना यह बगल में पसीने से बदबू पैदा करने वाले व्यक्तियों से लड़ेगा जिससे बगल से पसीने की बदबू नहीं आयेगी बात करते हैं अगले नुसखे की जो कि है 


फिटकरी

फिटकरी दोस्तों फिटकरी एक एंटीसेप्टिक है जो पसीने से आने वाली दुर्गंध को नष्ट कर दी है इसलिए नहाने के पानी में अगर आप एक चुटकी फिटकरी का पाउडर मिलाकर नहाते हैं तो इससे बॉडी से कम से कम पसीना निकलता है और पसीने से स्मेल भी नहीं आती है इसलिए नहाने के पानी में फिटकरी डालकर नहाते समय आपको इस बात का ध्यान रखना है कि फिटकरी की मात्रा आप ज्यादा ना डालें जी हां नहीं तो इससे स्किन में ड्राइनेस आ सकती है मतलब हल्की सी मात्रा ही आपको डालनी है ताकि कोई स्किन प्रॉब्लम आपको ना हो दोस्तो बात करते हैं अगले तरीके की जोकि 


बेड टीशु

बेड टीशु का प्रयोग करना जी हां बहुत ज्यादा पसीना अगर आता है और आप इसकी दुर्गन्ध से बचे रहना चाहते हैं तो तेल सोक्ता पेपर ले बेटा पसीना पोंछ लें या पेपर नमी को सोखने में कारगर होते हैं इसलिए अपनी बगल में इसे रगड़ना चाहिए जिसे पसीने से आने वाली दुर्गंध को रोका जा सके बात करते हैं अगले तरीके की जो कि है 


व्हीटग्रास

व्हीटग्रास का जूस पीना जी हां व्हीटग्रास यानी कि गेहूं के ज्वारे में को रोकना था मात्रा में पाया जाता है जिससे शरीर के जहरीले पदार्थ बाहर निकल जाते हैं इसलिए पसीने की बदबू से छुटकारा पाने के लिए रोजाना व्हीटग्रास का जूस पी सकते हैं थोड़ी मात्रा में बात करते हैं अगले तरीके की दोस्तों 


हल्का सा निंबू का रस

नहाने के पानी में हल्का सा निंबू का रस मिला ना जी हां हर दिन आप स्नान करने जाएं तो पानी में नींबू का रस आप मिक्स कर सकते हैं नींबू पानी से नहाने से आपका सारा दिन खुद को फ्रेशमिल करेगा और इससे बॉडी से आने वाली स्मेल भी दूर होगी अगर स्किन प्रॉब्लम से आप भूल रहे हैं तो नींबू काटकर उसे अंडर आर्म्स पर रगड़ भी सकते हैं या बेहतरीन डीओ की तरह वर्क करता है लेकिन यहां पर भी एक बात खास तौर पर ध्यान रखना दोस्तों बहुत से ऐसे व्यक्ति होते हैं जिसे नींबू से स्किन एलर्जी होती है तो आपको क्या करना है 


केवल 1 दिन हल्की मात्रा में नींबू मिलाकर स्नान करना है और उसके बाद दो या तीन दिन तक इसके प्रभाव को अपने शरीर पर देखना है अगर आपको कोई प्रॉब्लम नहीं होती है तो आप इसको आजमाएं और अगर आपको कोई प्रॉब्लम है तो इस उपाय को आप ना आजमाए हमने।


 जो पहले उपाय बताएं उसमें से आप किसी उपाय को आजमा सकते हैं तो दोस्तों यह थे वह सारे घरेलू तरीके जो मैं पसीने की बदबू से छुटकारा दिला सकते हैं वह भी आसानी से तो दोस्तों यही थी मेरी आज की जानकारी आप लोगों के लिए।


 उम्मीद करता हूं यह आर्टिकल और जानकारी आपको पसंद आई होगी अगर यह जानकारी अच्छी लगती है। इसे शेयर करें।         धन्यवाद....

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Monday, August 3, 2020

पतले पैरों को मोटा कैसे करे?

August 03, 2020 0
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पैरों को मोटा करने के 2 उपाय

दोस्तों अक्सर हमने देखा है कि कुछ पुरुषों के शरीर के मुताबिक उनके पैरों की मोटाई कम होती है। और अक्सर यह कमी पुरुषों में ही पाई जाती हैं। और इस बात की पुरुषों को चिंता भी होती है। कि वह वह इस बात को बहुत ही गंभीरता से सोचते हैं पर इनका उन्हें सही मार्गदर्शन नहीं मिल पाता। तो चलिए दोस्तों आज जानते हैं वह 2 उपाय कौन से है जिससे हम पैरों की मोटाई बढ़ा सकते हैं।

पैरों को मोटा करने के लिए क्या खाना चाहिए

जीवन में खाना-पीना अति आवश्यक बातें हमें जीवित रहने के लिए अत्यंत आवश्यक हमारा आहार होता है और आर के बिना हम जीवित नहीं रह सकते और जैसे हमारी आज जो मुश्किल है वह है पैरों को मोटा करने के लिए क्या करें इस बारे में आज हम बात कर रहे हैं तो मैं आप सभी को बताना चाहता हूं कि जो आप दैनिक जीवन में आहार लेते हो वही आहार आपके पैरों को मोटा करने में मददगार साबित हो सकता है।

हमारे दैनिक जीवन का जो रूटिंग है उसी हिसाब से हम जिस प्रकार का हर लेते हैं वही आहार हमारे जीवन के लिए सही होता है किसी भी प्रकार का आहार जो कि हमारे लिए कुछ अलग है जैसे मानो कुछ नया है उसे पचाने में ही हमारे शरीर की बहुत सारी शक्ति खत्म हो जाती है ऐसा अनोखा कोई आहार ना ले। क्योंकि दोस्तों बहुत सारी जगह पर ऐसा बताया जाता है कि यह आर लेने से आपके पैरों की मोटाई में बढ़ोतरी होगी पर मैं इस बात को नहीं मानता। दैनिक जीवन का आहार ही आपके लिए उत्कृष्ट है।

क्या दौड़ने से पैरों की मोटाई बढ़ सकती हैं?

दौड़ना एक व्यायाम है और दौड़ने से हमारे पैरों की मांसपेशियां मजबूत होती है और उससे हमारा स्वास्थ्य भी ठीक रहता है पर दोस्तों दौड़ने से पैरों की मोटाई बढ़ नहीं सकती फिर ऐसा क्या करें कि जिससे पैरों की मोटाई बढ़ जाए

पैरों की मोटाई बढ़ाने के लिए क्या उपाय करें

1) उठक बैठक
पैरों की मोटाई बढ़ाने के लिए सर्वोत्तम व्यायाम जो है वह है उठक बैठक, उठक बैठक लगाने से आपके पैरों की मांसपेशियां मजबूत और उसमें खिंचाव के साथ तनाव भी बनता है जिससे उस मांसपेशियों में ब्लड सरकुलेशन इस प्रकार से होता है जो हम दैनिक जीवन में आहार लेते हैं उस आहार को वह मांसपेशियां अब्जॉर्ब कर लेती है और उससे हमारे पैरों की मोटाई बढ़ने लगती है


उठक बैठक करने का सही समय क्या हो सकता है

उठक बैठक करने के लिए आपको किसी भी निश्चित समय की कोई पाबंदी नहीं है। आपको जब जी चाहे तब जब वक्त मिले तब आप उठक बैठक कर सकते हो और इसका फायदा जरूर आपके मांसपेशियों में मजबूती लाने में होता है। और साथ में आपके पैरों की मोटाई भी बढ़ती हैं। पर यह कार्य करते समय सुबह का समय कभी आपको मिलता है तो वह आपके लिए बहुत फायदेमंद होगा।

2) बॉबल एक्सरसाइज
इस एक्सरसाइज को करने के लिए आपको किसी जिम को ज्वाइन करना होगा बबल एक्सरसाइज की मदद से आपके पैरों की मोटाई बिल्कुल बढ़ सकती हैं और जैसे ही आप कोई जिनको जैन करेंगे तब जो भी कोई आपका ट्रेनर होगा उसे आप निसंकोच होकर बताइएगा कि आपको आपके पैरों की मोटाई बढ़ानी है तो वह व्यक्ति आपको उसी प्रकार का व्यायाम करने के लिए बताइएगा।

दोस्तों यह थे हमारे 2 उपाय इसकी सहायता से आप आपके पैरों की मोटाई बढ़ा सकते हैं आशा करते हैं कि आपको हमारी यह पोस्ट अच्छी लगी होंगी और आपके पास कुछ सुझाव होंगे तो जरूर कमेंट कीजिएगा धन्यवाद
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Sunday, August 2, 2020

टेस्ट ट्यूब बेबी IVF ट्रीटमेंट

August 02, 2020 0
IVF

टेस्ट ट्यूब बेबी?

लुइस ब्राउन जो अभी करीब 41 साल की है। लेकिन 25 जुलाई 1978 को जब इनका जन्म हुआ था तभी यह काफी चर्चा में आ गई थी। For the first time in history, a human being conceived in a laboratory has been delivered successfully। सोचने वाली बात यह है, कि यह है नॉर्मल सी दिखने वाली बच्ची, खबरों में क्यों आ रही थी क्योंकि यह दुनिया का सबसे पहला टेस्ट ट्यूब बेबी था। 

टेस्ट ट्यूब बेबी? नहीं नहीं, टेस्ट ट्यूब बेबी, टेस्ट ट्यूब में पैदा नहीं होता। तो फिर यह 

टेस्ट ट्यूब बेबी होता कैसे है? 

आपको पता है भारत में, 2.5 करोड़ से भी ज्यादा ऐसे कपल है, जो बच्चा पैदा नहीं कर पाते और दुनिया में हर 8 कप्ल में से 1 को बच्चा पैदा करने में दिक्कत आती है। और समय के साथ-साथ कपल्स में होने वाली इस दिक्कत की वजह से काफी सारे लोग ऐसे हैं जो टेस्ट ट्यूब बेबी करने का कोशिश कर रहे हैं। टेस्ट ट्यूब बेबी मतलब यह कोई अलग तरीके का बच्चा है? 

टेस्ट ट्यूब बेबी इंसान का ही बच्चा है ना?

 टेस्ट ट्यूब बेबी, वह बेबी है, जो IVF द्वारा पैदा होता है। अब IVF क्या है? IVF यानी In Vitro Fertilization जिसमें एक पुरुष के शुक्राणु, और स्त्री के अंडे को एक लैब में, एक पेट्री डिश के अंदर मिलाया जाता है 'In Vitro' का मतलब होता है शरीर से बाहर तो कोई भी प्रोसेस जो शरीर के अंदर ना होकर बाहर होता है, जैसे कि किसी लैब में उसे 'In Vitro' कहते हैं। आपको पता ही होगा कि एक नॉरमल प्रेगनेंसी में मेल स्पर्म फीमेल शरीर के अंदर जाकर उसके अंडे से मिलकर, एक सिंगल एक लौता सेल बनाता है। 

जिसे हम zygote कहते हैं और फिर यह zygote डिवाइड हो हो कर एक एंब्रियो बन जाता है और आखिर में, इसी तरीके से यह एंब्रियो भी, बढ़ते बढ़ते एक बच्चे का रूप ले लेता है। लेकिन IVF में पुरुष शुक्राणु और फीमेल अंडे का मिलन फीमेल के शरीर के अंदर नहीं बल्कि एक पेट्री डिश में किसी लैब में किया जाता है और फिर करीब 3 से 5 दिन बाद, जब यह सिंगल सेल या zygote एक एंब्रियों का रूप ले लेता है तो इसको फीमेल के यूट्रस में इंजेक्शन द्वारा डाला जाता है। 


उसके बाद, जो भी आगे का प्रोसेस है, शरीर में होता है, वह खुद ब खुद ही होता जाता है। अच्छा मतलब जो यह IVF द्वारा जो तरीके से बच्चों का पैदा होता है, उसको टेस्ट ट्यूब बेबी कहते हैं और बच्चा बाहर नहीं बनता, बच्चे शरीर में ही बनता है बस खाली वह जो फ्यूजन है, वह बाहर बनता है। लैब में होने वाले इस फर्टिलाइजेशन से पहले, मां बनने वाली स्त्री को कुछ हार्मोन इंजेक्शन या दवाइयों द्वारा दिए जाते हैं। जिसके वजह से, उसके शरीर में जो अंडे बनते हैं वह ज्यादा मात्रा में बनने लगते हैं।

 हर महीने, एक फीमेल के शरीर में एक अंडा बनता है लेकिन इन हारमोंस को लेने के बाद यह अंडे भारी मात्रा में बनने लगते हैं। अंडों के बनने के बाद, इन्हें एक फीमेल के शरीर से, इंजेक्शन द्वारा निकाला जाता है जिसके बाद इन्हें एक पेट्री डिश में पुरुष के शुक्राणु के साथ मिला दिया जाता है जहां पर यह पुरुष के शुक्राणु खुद-ब-खुद जाकर अंडे से मिल जाते हैं और फर्टिलाइजेशन हो जाता है। कभी कभार जब सारे शुक्राणु स्वस्थ ना हो, तो एक सिंगल स्वस्थ शुक्राणु को फीमेल के अंडे के अंदर सीधा इंजेक्शन द्वारा डाल दिया जाता है लैब में होने वाले इस फर्टिलाइजेशन के 3 से 5 दिन बाद जब एंब्रियो बन जाता है, 

फिर उस एंब्रियो को इंजेक्शन द्वारा ही, फीमेल के गर्भाशय में डाल दिया जाता है और वहां पर, यह एंब्रियो अपने आप ही बड़ के एक बच्चे का रूप लेता है। यह तो बहुत सही है यार, मतलब काफी सारे कपिल ऐसा करवा सकते हैं। IVF का ट्रीटमंट हर किसी के लिए कराना इतना आसान नहीं है क्योंकि इसमें काफी खर्च आता है। IVF की साइकिल में, यानी एक बार ट्राई करने में ही 1.5 से 2 लाख तक का खर्चा आ जाता है, जो हर कोई नहीं दे सकता। IVF की डिमांड अब दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है

 यह अब इतना आम हो चुका है कि अब तक करीब 80 लाख बच्चे इस तरीके से पैदा हो चुके हैं इसके द्वारा, कोई अगर सिंगल पैरंट भी बनना चाहता है तो वह भी मुमकिन है। और अगर होमोसेक्सुअल कपल भी यह बच्चा पैदा करना चाहे तो किसी और का अंडा और शुक्राणु लेकर, IVF द्वारा बच्चा पैदा कर सकते हैं। एक बात बताओ, यह IVF क्या हमेशा सही होता है? 

मतलब एक बार ट्राई करेंगे तो क्या बच्चा हो ही जाएगा?

 IVF हमेशा सफल नहीं होता किसी भी प्रक्रिया की तरह, IVF के पूरे पूरे संभावना होती हैं फेल होने के एक रिपोर्ट के मुताबिक, अगर फीमेल की उम्र 35 साल से कम है तो 40% संभावनाएं हैं, की IVF सफल होगा और जैसे-जैसे उम्र बढ़ती जाती है, IVF द्वारा मां बनने के चांसेस भी कम होती जाती है आपको पता है IVF द्वारा प्रेग्नेंट होने के चांसेस को बढ़ाने के लिए, एक फीमेल में एक बार में कई सारे एमब्रीओस इंजेक्ट कर दिए जाते हैं क्योंकि जरूरी नहीं है कि हर एंब्रियो बच्चा बन ही जाएगा। काफी सारी एंब्रियो ऐसे होते हैं जो शुरू में ही दम तोड़ देते हैं। लेकिन ज्यादा एंब्रियो डालने की वजह से, IVF प्रेगनेंसी में, जुड़वा या तीन चार बच्चे एक साथ पैदा होने के चांसेस, नॉरमल प्रेगनेंसी के मुकाबले ज्यादा रहते हैं। 

पर किसी भी IVF ट्रीटमेंट में यह पूरी कोशिश रहती है कि ऐसा ना हो। क्योंकि ज्यादा बच्चे होना, मां और बच्चे दोनों के लिए खतरनाक होता है। 3-4 एक साथ? इस प्रेगनेंसी में जो बच्चे पैदा होते हैं वह नॉर्मल ही होते हैं ना? ज्यादातर IVF बेबी, अभी 30 साल से नीचे नीचे के ही है क्योंकि जो पहली IVF बेबी पैदा हुई थी, लुइस ब्राउन, वह खुद ही अभी 41 साल की है। तो अभी तक तो इन बच्चों को नॉर्मल ही देखा जा रहा है एक छोटी सी बात जो नोटिस की जाती है, 

वह यह है की IVF द्वारा पैदा होने वाले ज्यादातर बच्चों का वजन कम होता है लेकिन ओवरऑल यह बच्चे नॉर्मल ही होते हैं। अब लुइस ब्राउन को ही देख लो, भैया कब वह 41 साल की हो गई है, 2 बच्चों की मां है और, खुशी खुशी अपनी लाइफ जी रही है। तो कैसे हैं आप सब लोग? मैं एकदम बढ़िया हूं और मुझे लगा कि मुझे हर आर्टिकल के आखिर में आपको बताना चाहिए कि मुझे यह प्रश्न कैसे आया? क्या सोचकर मैंने आर्टिकल की लिखा और आपकी जिंदगी खराब की, आपका टाइम वेस्ट किया।

 दरअसल इस आर्टिकल के लिए, अभी हाल ही में मेरी फैमिली में, एक कपल है, जो टेस्ट ट्यूब बेबी करने का ट्राई कर रहे हैं और उसके लिए वह डॉक्टर का चक्कर भी लगा रहे हैं तो बहुत सारा डिस्कशन हो रहा है, मैं कुछ कुछ पूछ रही थी, और वह उसका जवाब दे रहे थे। और मैंने सोचा कि यार, पहले टेस्ट ट्यूब बेबी टीवी पर कैसे सुनाई देता है, इंटरनेट पर आता था, अब यह इतना आम हो गया है, कि भैया अपने ही परिवार में कहीं सुनाई दे रहा है और एक दो लोगों के साथ डिस्कस करने के बाद मुझे यह पता चला कि, बहुत से लोग हैं जिनको जानकारी नहीं है, के टेस्ट ट्यूब बेबी कैसे बनता है? क्या होता है? 

उनको बस यह पता है कि हां कुछ ट्रीटमेंट हो रहा है कहीं लोग जाते हैं डॉक्टर के पास, और बस ठीक हो जाते हैं और बच्चा हो जाता है। तो मुझे लगा कि यार इसमें आर्टिकल लिखना जरूरी है, मुझे भी बहुत सारी चीजें नहीं पता है इसलिए और मुझे भी जानना जरूरी है, और अगर मैं जानलू तो आपको बताऊंगा तो ही, वह तो करना ही है तो इसलिए मैंने यह आर्टिकल बनाया, और आप सब लोगों के साथ शेयर किया अब इस आर्टिकल आपको कैसा लगा है, उतना तो आप कर ही सकते हो, कि मुझे बता दो कॉमेंट करके कमेंट करके जरूर बताना
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बुखार क्या है और हमें क्यों आता है?

August 02, 2020 1
बुखार क्या है और हमें क्यों आता है?


बुखार क्यों आता है?

 भले ही बाहर का तापमान समय-समय पर बदलता रहता है, हमारे शरीर का आंतरिक तापमान काफी स्थिर रहता है।  हमारे शरीर का आंतरिक तापमान लगभग 37 डिग्री सेल्सियस या 98.6 डिग्री फ़ारेनहाइट होता है।  लेकिन कभी-कभी यह आंतरिक तापमान कुछ हद तक बढ़ जाता है।  हम ठंड, झुलस महसूस करते हैं और बीमार महसूस करते हैं।

आमतौर पर, यह उच्च तापमान (बुखार) संक्रमण के कारण होता है।  लेकिन कैंसर, हीट स्ट्रोक आदि जैसी बीमारियां भी बुखार का कारण बन सकता हैं। जब भी हमें लगता है कि हमें बुखार हो गया है और हम बीमार महसूस कर रहे हैं, हम थर्मामीटर का उपयोग करते हैं।  थर्मामीटर एक उपकरण है जो हमें हमारे शरीर के आंतरिक तापमान को मापने में सक्षम बनाता है।

 एक सामान्य दिन पर, यह तापमान एक-एक डिग्री तक उतार-चढ़ाव करता रहता है।  लेकिन हम इसे बुखार ही कहते हैं जब तापमान 38 डिग्री सेल्सियस या 100 डिग्री फ़ारेनहाइट से अधिक हो जाता है।  लेकिन अब आपको विचार करना चाहिए ... हमारी

 आंतरिक व्यवस्था पूरी तरह से क्यों बढ़ रही है?

बहुत से लोग बुखार को एक बीमारी के रूप में देखते हैं ... लेकिन यह असत्य है।  बुखार वास्तव में एक अंतर्निहित बीमारी का लक्षण है।  वास्तव में, बुखार हमारी मदद करने के लिए हमारे शरीर का तरीका है।  अब आप सोच रहे होंगे HOW?  प्रश्न का उत्तर, हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली को समझने में निहित है।  प्रतिरक्षा हमारे शरीर की क्षमता है ...

प्रतिरक्षा प्रणाली को समझने

हमें बीमारियों से बचाती है।  हमारी प्रतिरक्षा कोशिकाएँ रोगाणुओं (रोगजनकों) के कारण इन बीमारियों से लड़ती हैं, जिससे हमें बीमार होने से बचाया जा सके।  दरअसल, इन रोगजनकों के खिलाफ लड़ाई में शरीर के तापमान में वृद्धि होती है।  कई बैक्टीरिया और वायरस इस उच्च तापमान के लिए असहिष्णु हैं।  साथ ही, एक हालिया अध्ययन के अनुसार, यह भी पाया गया है ... कि उच्च आंतरिक तापमान भी कुछ प्रतिरक्षा कोशिकाओं की संख्या में वृद्धि की ओर जाता है।  नए और पुराने शोध अध्ययनों से, हम यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि रोग के कारण रोग से लड़ने के लिए हमारे शरीर का तरीका है।

ज्यादातर मामलों में, बुखार केवल 2 - 4 दिनों तक रहता है।  चूंकि हमें बुखार में बहुत पसीना आता है ... और हमारे शरीर में बहुत अधिक पानी की कमी होती है, इसलिए हमें सामान्य से अधिक पानी पीने की सलाह दी जाती है, और हमें आराम करना चाहिए।  आम तौर पर, हल्के बुखार में दवाओं की आवश्यकता नहीं होती है, लेकिन बहुत से लोग उस पल को गोली लेते हैं जो उन्हें बुखार लगता है।


इन दवाओं के अपने साइड इफेक्ट्स हैं, और उन्हें हर बार लेने के बाद अनुकूल नहीं है।  यदि आपका बुखार वास्तव में अधिक है, और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि आप काफी बीमार महसूस कर रहे हैं।  फिर डॉक्टर को देखने के लिए बेहतर है, और केवल निर्धारित दवाएं लें।


तो, उम्मीद है कि आप को पता चला है ... कि बुखार वास्तव में एक बीमारी नहीं है ... लेकिन हमारे शरीर का अंतर्निहित तंत्र हमें बीमारी से लड़ने में मदद करता है।  यदि आपके पास इन जैसे अन्य प्रश्न हैं, तो आप हमें जवाब देना चाहेंगे, ... आप हमें इसमें लिख सकते हैं  नीचे टिप्पणी अनुभाग।  हम सवालों के जवाब देने की पूरी कोशिश करेंगे।  अलविदा।
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Saturday, August 1, 2020

चांद में दाग, क्यों है?

August 01, 2020 0

चांद में दाग 

हमारे सुंदर से चांद को अगर करीब से देखा जाए तो पता चलता है कि चांद पर सिर्फ यह काले धब्बे ही नहीं बल्कि पूरा चांद अलग-अलग छोटे-बड़े साइज के खड्डों से भरा हुआ है और इन खंडों को craters कहते हैं। करीब 46 करोड़ साल पहले जब हमारा चांद बना था उस समय हमारे सोलर सिस्टम में काफी हलचल रहती थी छोटे बड़े पत्थर, एस्टेरॉइड, मेटियोरॉइड यहां वहां आतंक मचाते रहते थे। 

मतलब फुल उथल-पुथल। तब से यह चांद अलग-अलग तरह के पत्थरों के टकराने से पिटा हुआ है। और इसके काफी सारी craters, यह खड्डे जो आज हमें दिखाई देते हैं कई करोड़ साल पुराने हैं। लेकिन हमारा यह चांद, इन craters से पूरा ही भरा हुआ है। तो फिर यह 

काले धब्बे क्या है जो हमें अलग से दिखाई देते हैं?

 दूर से दिखने वाले यह काले धब्बे जिन्हें Maria कहते हैं इनकी कहानी थोड़ी अलग है। पुराने समय में टेलीस्कोप से देखने के बाद इन काले धब्बों को चांद के समुद्र की तरह देखा जाता था। लेकिन विज्ञान के उन्नति होते होते हमें पता चला यह काले धब्बे पानी के समुद्र नहीं है। माना जाता है कि यह काले धब्बे चांद पर ज्वालामुखी फूटने की वजह से लावा से भरे हुए हिस्से हैं और अब यह लावा से भरे हुए हिस्से सुख कर ऐसे काले दाग जैसे दिखाई देते हैं। चांद के अलग अलग हिस्सों पर यह लावा क्यों निकले इसके लिए अभी तक तो यही कहा जा रहा है की बड़े-बड़े एस्टेरॉइड्स के टकराने की वजह से ही चांद के अंदर से यह लावा फूट पड़े। लेकिन जब 

चांद पर इतने craters है तो धरती पर क्यों नहीं है?

 पत्थर तो धरती पर भी टकरा सकते हैं? यह बात सच है धरती की शक्तिशाली गुरुत्वाकर्षण बल होने की वजह से एक एस्टेरॉइड के चांद के मुकाबले धरती के तरफ गिरने के ज्यादा संभावनाएं हैं। लेकिन फिर भी चांद के ऊपर ज्यादा craters मौजूद है धरती के मुकाबले इसका कारण काफी सिंपल है। सबसे पहला कारण तो धरती का वायुमंडल ही है हमारी पृथ्वी के बाहर काफी सारे गैसेस के स्तर हैं जो उसके लिए एक सुरक्षा कवच की तरह काम करती है। ज्यादातर मेटियोरॉइड, और एस्टेरॉइड पृथ्वी के तरफ आते आते ही हमारे वायुमंडल में ही जल जाते हैं और धरती तक पहुंच ही नहीं पाते। बस यही होता है जब हम आसमान में टूटता तारा देखते हैं। और अगर आप जानना चाहते हैं कि यह 

धरती के वायुमंडल

हम बात कर रहे थे धरती के वायुमंडल की तो चांद के पास उसको बचाने के लिए ऐसा कोई वायुमंडल नहीं है और जब की चांद और पृथ्वी पर करीब करीब समान एस्टेरॉइड और मेटियोरॉइड गिरते हैं धरती तक ज्यादातर पहुंच ही नहीं पाते हैं। जय हो वायुमंडल बाबा की! चांद पर इतने सारे craters होने का दूसरा कारण यह है कि चांद पर ना तो कोई हवा है, ना पेड़ पौधे हैं और ना ही कोई मौसम बदलने का चक्कर है। तो जो craters एक बार चांद पर बन जाते हैं वह धरती के तरह पानी या हवा से भरते या मिटते नहीं है।

 चांद पर बना छोटे से छोटा निशान कभी नहीं मिटता और इसीलिए जो अंतरिक्ष यात्री कई साल पहले चांद पर गए थे उनके पैरों के निशान आज तक वहां मौजूद हैं। इसके अलावा हमारे धरती पर होने वाले ज्वालामुखी और भूकंप भी धरती के इन craters का टाइम टू टाइम सफाया करते रहते हैं। तो बेचारा चांद, पृथ्वी के मुकाबले अपनी तरफ कम पत्थरों को आकर्षित करता है लेकिन जो भी पत्थर एक बार चांद की तरफ चला जाए वह वहां पहुंच ही जाता है। और एक बार वहां कोई निशान या खड्डा या कोई बड़ा सा crater बन जाए तो वह हमेशा के लिए वहीं जम जाता है।
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