चांद में दाग, क्यों है? - Life At Exp

New Articles

Saturday, August 1, 2020

चांद में दाग, क्यों है?


चांद में दाग 

हमारे सुंदर से चांद को अगर करीब से देखा जाए तो पता चलता है कि चांद पर सिर्फ यह काले धब्बे ही नहीं बल्कि पूरा चांद अलग-अलग छोटे-बड़े साइज के खड्डों से भरा हुआ है और इन खंडों को craters कहते हैं। करीब 46 करोड़ साल पहले जब हमारा चांद बना था उस समय हमारे सोलर सिस्टम में काफी हलचल रहती थी छोटे बड़े पत्थर, एस्टेरॉइड, मेटियोरॉइड यहां वहां आतंक मचाते रहते थे। 

मतलब फुल उथल-पुथल। तब से यह चांद अलग-अलग तरह के पत्थरों के टकराने से पिटा हुआ है। और इसके काफी सारी craters, यह खड्डे जो आज हमें दिखाई देते हैं कई करोड़ साल पुराने हैं। लेकिन हमारा यह चांद, इन craters से पूरा ही भरा हुआ है। तो फिर यह 

काले धब्बे क्या है जो हमें अलग से दिखाई देते हैं?

 दूर से दिखने वाले यह काले धब्बे जिन्हें Maria कहते हैं इनकी कहानी थोड़ी अलग है। पुराने समय में टेलीस्कोप से देखने के बाद इन काले धब्बों को चांद के समुद्र की तरह देखा जाता था। लेकिन विज्ञान के उन्नति होते होते हमें पता चला यह काले धब्बे पानी के समुद्र नहीं है। माना जाता है कि यह काले धब्बे चांद पर ज्वालामुखी फूटने की वजह से लावा से भरे हुए हिस्से हैं और अब यह लावा से भरे हुए हिस्से सुख कर ऐसे काले दाग जैसे दिखाई देते हैं। चांद के अलग अलग हिस्सों पर यह लावा क्यों निकले इसके लिए अभी तक तो यही कहा जा रहा है की बड़े-बड़े एस्टेरॉइड्स के टकराने की वजह से ही चांद के अंदर से यह लावा फूट पड़े। लेकिन जब 

चांद पर इतने craters है तो धरती पर क्यों नहीं है?

 पत्थर तो धरती पर भी टकरा सकते हैं? यह बात सच है धरती की शक्तिशाली गुरुत्वाकर्षण बल होने की वजह से एक एस्टेरॉइड के चांद के मुकाबले धरती के तरफ गिरने के ज्यादा संभावनाएं हैं। लेकिन फिर भी चांद के ऊपर ज्यादा craters मौजूद है धरती के मुकाबले इसका कारण काफी सिंपल है। सबसे पहला कारण तो धरती का वायुमंडल ही है हमारी पृथ्वी के बाहर काफी सारे गैसेस के स्तर हैं जो उसके लिए एक सुरक्षा कवच की तरह काम करती है। ज्यादातर मेटियोरॉइड, और एस्टेरॉइड पृथ्वी के तरफ आते आते ही हमारे वायुमंडल में ही जल जाते हैं और धरती तक पहुंच ही नहीं पाते। बस यही होता है जब हम आसमान में टूटता तारा देखते हैं। और अगर आप जानना चाहते हैं कि यह 

धरती के वायुमंडल

हम बात कर रहे थे धरती के वायुमंडल की तो चांद के पास उसको बचाने के लिए ऐसा कोई वायुमंडल नहीं है और जब की चांद और पृथ्वी पर करीब करीब समान एस्टेरॉइड और मेटियोरॉइड गिरते हैं धरती तक ज्यादातर पहुंच ही नहीं पाते हैं। जय हो वायुमंडल बाबा की! चांद पर इतने सारे craters होने का दूसरा कारण यह है कि चांद पर ना तो कोई हवा है, ना पेड़ पौधे हैं और ना ही कोई मौसम बदलने का चक्कर है। तो जो craters एक बार चांद पर बन जाते हैं वह धरती के तरह पानी या हवा से भरते या मिटते नहीं है।

 चांद पर बना छोटे से छोटा निशान कभी नहीं मिटता और इसीलिए जो अंतरिक्ष यात्री कई साल पहले चांद पर गए थे उनके पैरों के निशान आज तक वहां मौजूद हैं। इसके अलावा हमारे धरती पर होने वाले ज्वालामुखी और भूकंप भी धरती के इन craters का टाइम टू टाइम सफाया करते रहते हैं। तो बेचारा चांद, पृथ्वी के मुकाबले अपनी तरफ कम पत्थरों को आकर्षित करता है लेकिन जो भी पत्थर एक बार चांद की तरफ चला जाए वह वहां पहुंच ही जाता है। और एक बार वहां कोई निशान या खड्डा या कोई बड़ा सा crater बन जाए तो वह हमेशा के लिए वहीं जम जाता है।

No comments:

Post a Comment